CG ब्रेकिंग : शराब घोटाले पर ED का बड़ा एक्शन,ED ने अटैच की अनवर ढेबर, एपी त्रिपाठी और आईएएस अफसर की संपत्ति,जानिए कितने करोड़ की संपत्ति हुई अटैच…
छत्तीसगढ़ में दो हजार करोड़ रुपए के कथित शराब घोटाले की जांच कर रही ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने इंडियन टेलीकॉम सर्विस के अफसर और आबकारी विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी अरुण पति (एपी) त्रिपाठी व कारोबारी अनवर ढेबर सहित अन्य की 121.87 करोड़ की संपत्ति अटैच कर ली है.




रायपुर. छत्तीसगढ़ में दो हजार करोड़ रुपए के कथित शराब घोटाले की जांच कर रही ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने इंडियन टेलीकॉम सर्विस के अफसर और आबकारी विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी अरुण पति (एपी) त्रिपाठी व कारोबारी अनवर ढेबर सहित अन्य की 121.87 करोड़ की संपत्ति अटैच कर ली है. इस मामले में अब तक 180 करोड़ की संपत्ति अटैच की जा चुकी है.
आपको बता दें कि ईडी ने इस मामले में सबसे पहले छह मई को रायपुर के महापौर और कांग्रेस नेता एजाज ढेबर के बड़े भाई अनवर को गिरफ्तार किया था।इसके बाद राजधानी रायपुर स्थित गिरिराज होटल के प्रमोटर पुरोहित और शराब कारोबारी ढिल्लों को गिरफ्तार किया गया था। त्रिपाठी को जांच एजेंसी ने 12 मई को गिरफ्तार किया था।उन्होंने बताया कि भारतीय दूरसंचार सेवा के अधिकारी त्रिपाठी आबकारी विभाग में प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं और वे छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (जो राज्य में उपभोक्ताओं को सभी प्रकार की शराब, बीयर आदि की खुदरा बिक्री का काम करता है) के प्रबंध निदेशक भी है।
ईडी ने कहा है कि उसने आयकर विभाग की ओर से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी टुटेजा और अन्य के खिलाफ दिल्ली की एक अदालत में दाखिल आरोपपत्र के आधार पर धनशोधन का एक मामला दर्ज किया था।ईडी ने अदालत में कहा था कि एक गिरोह द्वारा छत्तीसगढ़ में शराब व्यापार में एक बड़ा घोटाला किया गया जिसमें राज्य सरकार के उच्च-स्तरीय अधिकारी, निजी व्यक्ति और राजनीति से जुड़े लोग शामिल थे। ईडी ने कहा कि इन लोगों ने 2019-22 के बीच दो हजार करोड़ रुपये से अधिक का भ्रष्टाचार किया।
इसने कहा था कि अनवर के साथ टुटेजा गिरोह का ‘सरगना’ था और भ्रष्टाचार के पैसे का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए भी किया गया था।यह भी आरोप लगाया गया है कि सीएसएमसीएल (शराब की खरीद और बिक्री के लिए राज्य निकाय) से खरीदी गई प्रति पेटी शराब के आधार पर राज्य में शराब बनाने वालों से ‘रिश्वत’ ली गई थी और देशी शराब की बिक्री का कोई हिसाब-किताब नहीं रखा गया।एजेंसी ने दावा किया है कि शराब बनाने वाले लोगों से ‘रिश्वत’ ली गई ताकि उन्हें ‘संघ’ बनाने और बाजार में निश्चित हिस्सेदारी रखने की अनुमति मिल सके।