दरोगा समेत 3 निलंबित: फोन कर हाईकोर्ट जज से पूछा घर का पता, SP ने SI सहित 3 जवान को किया सस्पेंड, आदेश जारी.....
3 policemen including SI suspended, Calling High Court judge asked home address, order issued डेस्क. उत्तर प्रदेश पुलिस के दरोगा और दो कांस्टेबल को निलंबित किया गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज से फोन पर घर का पता पूछने का आरोप है. उन्होंने जज से सीधे सवाल किया, “आपका घर कहां है, और आपको कहां जाना है?” इस पर जज ने नाराजगी जताते हुए पुलिस महकमे में उनकी शिकायत की, जिस पर एक्शन लेते हुए पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया. मामला दिवाली से एक दिन पहले अंबेडकर नगर जिले का है. मामले की जांच के भी आदेश दिए गए हैं.




3 policemen including SI suspended, Calling High Court judge asked home address, order issued
डेस्क. उत्तर प्रदेश पुलिस के दरोगा और दो कांस्टेबल को निलंबित किया गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज से फोन पर घर का पता पूछने का आरोप है. उन्होंने जज से सीधे सवाल किया, “आपका घर कहां है, और आपको कहां जाना है?” इस पर जज ने नाराजगी जताते हुए पुलिस महकमे में उनकी शिकायत की, जिस पर एक्शन लेते हुए पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया. मामला दिवाली से एक दिन पहले अंबेडकर नगर जिले का है. मामले की जांच के भी आदेश दिए गए हैं.
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस प्रकाश सिंह जिले के दौरे पर जाने वाले थे. सब इंस्पेक्टर तेज बहादुर सिंह, कांस्टेबल ऋषभ राज यादव और अयूब वली की एस्कॉर्ट ड्यूटी लगाई गई थी. इन पर आरोप है कि जज से ही फोन कर पूछा कि आपका घर कहां पर है और कहां जाना है. इस बात से जज ने नाराज होकर एसपी से अपनी नाराजगी जताई, जिसके बाद तीनों को सस्पेंड कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है.
यह भी पता लगाया जा रहा है कि इनके पास जज का नंबर कहां से आया. निलंबन आदेश में कहा गया है की जिला अंबेडकर नगर के कांस्टेबल ऋषभ राज यादव गंभीर आरोप का सामना कर रहे हैं. कांस्टेबल को न्यायाधीश प्रकाश सिंह की एस्कॉर्ट ड्यूटी पर तैनात किया गया था. एस्कॉर्ट ड्यूटी पर कर्मचारियों ने न्यायाधीश से पूछा, "कहां है आपका घर, और आपको कहां जाना है" यह हमारे संज्ञान में आया है.
निलंबन आदेश में कहा गया है की आरोप गंभीर प्रकृति के हैं. इसलिए उत्तर प्रदेश अधीनस्थ ग्रेड पुलिस अधिकारी (दंड और अपील) मैनुअल-1991, नियम 17(1) प्रावधानों के अनुसार तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच पर विचार किया गया है. पुलिसकर्मियों को इस तरह सीधे जज से सवाल नहीं करना चाहिए था, बल्कि उनके प्रोटोकॉल की निगरानी करने वाले लोगों से इसकी जानकारी लेनी चाहिए थी.