नक्सलियों के ख़िलाफ़ लड़ाई की ऐ कैसी तैयारी 6 वर्षों में 58 किलोमीटर सड़क नहीं बनवा पाया पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन विभाग..




*58 में शुरूवाती 9 किलोमीटर सड़क पीडब्ल्यूडी विभाग ने बनवा वह भी ख़राब हूई*
* जून में चिंतलनार तक सड़क का कार्य पूर्ण करने की सुरक्षाबलों ने की थी तैयारी
दोरनापाल- नक्सलियों के ख़िलाफ़ यूँ तो लड़ाई को लेकर राज्य से लेकर केंद्र तक बड़ी बड़ी बैठकों का सिलसिला चलता है और जब बैठकों के बाद बयान आते हैं तब लगता है की बस अब नक्सलवाद का अंत जल्द ही होने वाला है पर जब धरातल में नक्सलवाद की लड़ाई की हक़ीक़त टटोली जाती है तो नक्सलवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई की तैयारियों के दावे पर पानी फेर देने वाला साबित होता है दरअसल नक्सलवाद के ख़िलाफ़ केंद्र व राज्य सरकार ने स्पष्ट तौर पर सीधी लड़ाई करने का ऐलान किया है और इसके लिए नक्सल इलाक़ों के विकास पर सबसे जादा फ़ोकस भी किया जा रहा है पर नक्सलियों की अघोषित राजधानी कहे जाने वाले इलाक़े में विभागिय उदासीनता और ठेकेदारों की मनमानी के चलते नक्सलवाद के ख़िलाफ़ पुरी लड़ाई पर सवालिया निशान खड़े होने लगे है दरअसल सुकमा ज़िले के दोरनापाल से जगरगुंडा जाने वाले वाले 58 किलोमीटर सड़क का कार्य वर्ष 2015 में शुरू कराया गया था और वह निर्माण कार्य 6 वर्ष बीत जाने के बाद भी पुरा नहीं हो पाया है दोरनापाल से शुरूवाती 9 किलोमीटर का कार्य पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा डामरीकृत सड़क बनाया गया है जिसमें भी बनने के महज महीने भर के अंदर ही शुरूवात के तीन किलोमीटर की सड़क ख़राब हो गई उस घटाया सड़क की जाँच हूई पर जाँच रिपोर्ट फ़ाइलों तक ही सिमित रही अंततः सड़क आज भी सड़क उसी हालत में है अब तो शुरूवाती 9 किलोमीटर में डामरीकृत सड़क पर सीसी सड़क निर्माण का निर्णय लिया गया जो निविदा प्रक्रिया में है वही इसके बाद से जगरगुंडा तक तक़रीबन 47 किलोमीटर सड़क का निर्माण कराने का ज़िम्मा पुलिस विभाग के ही विंग पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन विभाग को सौंपा गया जिसके बाद 6 वर्षों बाद भी वह सड़क आँधी ही बन पाई है वह भी आँधी अधूरी और विभाग
ठेकेदारों पर मेहरबानी दिखाते अब तक उक्त निविदा को निरस्त कर ठेकेदारों पर कार्यवाही तक नहीं कर पाया है वहीं पुरे मामले पर पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन के एमडी पवन देव से भी हमने बात करने की कोशिश की पर दुरभाष में उनसे बात नहीं हो पाई
1 सौ 25 करोड़ के कार्य में पाँच ठेकेदार फिरभी काम अधूरा
दोरनापाल से जगरगुंडा तक 47 किलोमीटर की सड़क की ज़िम्मेदारी पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन विभाग को मिली है 125 करोड़ की लागत से बनने वाले इस सड़क के लिए पाँच ठेकेदार क्वालिफ़ाई हुए थे जिन्हें टेंडर मिला था उनमें किलोमीटर 10 से 11 गुप्ता कंस्ट्रक्शन को 12 से 20 आर एंड कम्पनी हैदराबाद को 21 से 22 गुप्ता कंस्ट्रक्शन को 23 से 28 एवीए बिल्डकॉन रायपुर को 29 से 32 गुप्ता कंस्ट्रक्शन 33 से 38 जीआरपी कंस्ट्रक्शन को 39 से 49 गुप्ता कंस्ट्रक्शन को 50 से 52 जयसवाल कंस्ट्रक्शन को 53-54 गुप्ता कंस्ट्रक्शन एवं 55 से 56 जयसवाल कंस्ट्रक्शन ने कार्य करने सबसे कम दाम पर निविदा डाली थी वहीं अंत के 2 किलोमीटर सड़क का टेंडर नहीं हो पाया था बावजूद इसके 6 वर्षों में कार्य पूर्ण नहीं कराया जा सका जबकी बीजापुर के बासागुड़ा की ओर से जगरगुंडा तक और मिनपा मार्ग पर अब सड़क निर्माण युद्ध स्तर पर जारी है
इसी सड़क के निर्माण की सुरक्षा में लगे 25 जवान हुए थे शहीद
जिस सड़क को विभागीय लापरवाही और ठेकेदारो की मनमानी की वजह से 6 वर्ष बाद भी पूर्ण नहीं किया जा सका है उसी सड़क की सुरक्षा में लगे सीआरपीएफ़ की 74वी बटालियन के 25 जवान सड़क के निर्माण में सुरक्षा देते नक्सली हमले में शहीद हो गए थे इसके बाद भी सड़क निर्माण में सीआरपीएफ़ की 150वी, 223वी, 74वी, द्वितीय एवं बस्तरिया बटालियन के जवान एवं कोबरा की 201वी, 206वी बटालियन एवं डीआरजी एसटीएफ़ एवं ज़िला बल के जवान लगातार सुरक्षा देते आए है
निर्माण कम्पनियों पर कार्यवाही की बजाए मिला टाइम एक्सटेंशन
पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन विभाग द्वारा 6 वर्ष तक सड़क का निर्माण पूर्ण नहीं करने वाले ठेकेदारों पर किसी तरह की कार्यवाही नहीं करने पर अब सवाल खड़े होने लगे है एक ओर जहां सड़क की सुरक्षा में जवान अपना खुन बहा रहे हैं तो वही सड़क निर्माण कम्पनियाँ अपनी मनमानी पर तुलीं है मौसम की तरह कभी तीन महीने बाद तो कभी चार महीने बाद कुछ दुरी तक काम किया जाता है फिर वही अगले तीन से चार महीने काम बंद कर दिया जाता है बावजूद इसके विभाग द्वारा ठेकेदारों पर समय सीमा में काम पूर्ण नहीं करने पर कार्यवाही करने की बजाए सड़क सीमा की समय सीमा बढ़ा दी जाती रही जिसका नतिजा है की आज भी सड़क पूर्ण नहीं हो पाया है
58 किलोमीटर की सड़क पर हमें 47 किलोमीटर की ज़िम्मेदारी मिली थी जिसमें 25 किलोमीटर सड़क का कार्य पूर्ण कर लिया गया है जबकी 3 किलोमीटर डीएलसी का कार्य पूर्ण हो चूका है जल्द ही कार्य प्रारंभ कर पूर्ण करने का लक्ष्य है
विरेंद्र पटेरिया, ईई पुलिस हाउसिंग