रंगो का त्यौहार होली मनाने लखनपुर उदयपुर सहित क्षेत्र के लोगों में उत्साह जोरों शोरों से।




लखनपुर नयाभारत सितेश सिरदार:–बुराई पर अच्छाई के जीत का प्रतीक है होली। चंद दो दिनों बाद रविवार 24 एवं सोमवार 25 मार्च को मनाया जाएगा । यह त्योहार भगवान विष्णु अवतार नरसिंह द्वारा राक्षस राज हिरण्यकश्यप पर जीत का सम्मान करता है। इसी दिन राक्षस राज हिरण्यकश्यप की बहन आग में जल कर भस्म हुई थी। यह किंवदंती प्रचलित है कि ईश्वर कृपा से भक्त प्रहलाद धधकते आग के बीच से सकुशल बच गए थे लेकिन होलिका जल कर राख हो गई थी। जुल्मी हिरण्यकश्यप के ज़ुल्म से भगवान नरसिंह ने निरीह प्राणियों को भयमुक्त कराया था। हिरण्यकश्यप के अंत होने पर लोगों ने रंग-गुलाल से जश्न मनाया । और यही से शुरू हुआ रंगोंत्सव होली मनाने की परम्परा,
होली वह त्योहार है जो लोगों के सुस्त जीवन में रंगों की तरह ढ़ेर सारी रंगीन खुशियां प्यार उत्साह लेकर आता है। रंगों का त्योहार फागुन आपसी भाईचारे की सबक सिखाता है।धार्मिक कथाओं के अनुसार – फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि को होली मनाया जाता है। ऋतुराज बसंत का आगमन प्रकृति रंग-बिरंगे फूलों से सजे फिज़ा को खुशगवार बना देता है हर तरफ वातावरण में आनंद उल्लास का माहौल होता है। खुशी का इजहार करने के लिए सभी गिले-शिकवे भुलाकर लोग रंगों का त्योहार होली मनाते हैं। ऐसा खूबसूरत नजारा सर्द मौसम के मखमली सर्दी कहीं दूर जा रही होती है, और सर्दी गर्मी के संगम का एहसास के साथ टोली बनाकर मस्त नाचते गाते रंगों के त्योहार होली मनाते हैं। फागुन खुशियों का एहसास कराता है।फाग गीतों के खुमार में डुबे युवाओं की टोली डीजे साउण्ड सिस्टम ढोल नगाड़ों के थाप पर थिरकते रंगों से सराबोर खुशी का इजहार करते हैं । यही इस त्योहार की संस्कृति रही है।होलिका दहन को छोटी होली के नाम से जाना जाता है यह भक्त प्रहलाद की याद में मनाया जाता है।जिन्हें भगवान नरसिंह ने उनके राक्षस पिता से बचाया था धार्मिक कथाओं से पता चलता है कि हिरंणयकश्यप ने अपने बहन होलिका के साथ चीता में भक्त प्रहलाद को बैठा दिया था लेकिन भगवान विष्णु के माया से होलिका तो जल गई भक्त प्रहलाद सकुशल बच गए इसके बाद भगवान नरसिंह ने हिरयकश्यप का वध कर दिया।इसी खुशी में लोगों ने नाचते गाते रंगों का त्योहार होली मनाया ।तब से होली मनाने की चलन आरंभ हुई। इस साल 24 मार्च दिन रविवार को होलिका दहन तथा 25 मार्च दिन सोमवार को धूलंडी के साथ रंगोंत्सव होली मनाई जाएगी।होली के त्यौहार को लेकर विशेष तैयारी की जा रही है बाजारों में हर प्रकार के रंग गुलाल पिचकारी मुखौटो से दुकान सज गये हैं। लोग अपने मनपसंद के रंग गुलाल अबीर पिचकारी मुखोटे इत्यादि की खरीदारी करते नजर आने लगे हैं। क्षेत्र में सब तरफ होलीयाना खुमार छाया हुआ है। यदि पुराने जमाने की बात कही जाये तो,फाग गीतों की महफ़िल लगभग उठ सा गया है। पहले महिनों फाग गीतों की महफ़िल सजा करती थी। लोग एकजुट होकर किसी गली चौबारे में बैठ कर फागुन के गीत गाया करते थे। रात के पहले पहर में जब दूर से फाग गीतों के साथ ढोल नगाड़ों की स्वरलहरी सुनाई देती और तो अनायास ही दिलो-दिमाग में खुद -ब- खुद एक ख़ुशी का एहसास हुआ करता था। रंगों का त्योहार होली मनाये जाने की अनुभूति होती थी। महिनों फाग गीतों का आयोजन होता था। लेकिन अब सिर्फ यादों में ही सिमट कर रह गया है। पुराने जमाने में लोक परम्परा अनुसार ग्राम बैगा सेमल डगाल की होलिका स्थापित किया करता था जहां लोग लकड़ी इकठ्ठा किया करते थे। ग्राम बैगा होलिका दहन पूजा किया करते थे इसके बाद होलिका दहन होता था। प्रथा आज भी जिंदा है। दरअसल टी बी मोबाइल के युग ने कुछ परम्पराओं को लोग भूलते जा रहे हैं। गांवों के फाग गीत ही नहीं अपितु दूसरे सभी महफ़िल को आधुनिकता ने अपने आप में समेट लिया है।होली से जुड़े बहुत सारे पहलू है। स्कूली बच्चे अपने सहपाठियों को रंग गुलाल लगा कर जमकर होली मनाया दुकानों में धुलंडी से पहले रंग अबीर लगाकर लोग एक दूसरे को बधाई दें रहे हैं सिलसिला जारी है बहरहाल होली मनाने लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।