कुछ चीजें तुरंत तो कुछ चीजें समय पर बताने वाली होती है - बाबा उमाकान्त

कुछ चीजें तुरंत तो कुछ चीजें समय पर बताने वाली होती है - बाबा उमाकान्त
कुछ चीजें तुरंत तो कुछ चीजें समय पर बताने वाली होती है - बाबा उमाकान्त

कुछ चीजें तुरंत तो कुछ चीजें समय पर बताने वाली होती है - बाबा उमाकान्त

जात पात पूछे नहीं कोई, हरि को भजे सो हर का होई

उज्जैन (म.प्र.)। प्रेमियों की ही नहीं उनके घर परिवार की भी संभाल करने वाले, अपने आप को सेवक कहने वाले, अपनी पॉवर ताकत को छुपा कर रखने वाले ताकि जीवों के आत्म कल्याण के काम में बाधा न आये, जिनके दरबार में कोई जातिवाद भाषावाद एरियावाद भाई-भतीजावाद आदि नहीं चलते केवल मानववाद चलता है ऐसे इस समय प्रभु भगवान के साक्षात अवतार, जो सब कुछ है, ऐसे पूरे समरथ सन्त सतगुरु, परम दयालु, त्रिकालदर्शी, दुःखहर्ता, उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त महाराज ने 1 जनवरी 2023 प्रातः उज्जैन आश्रम में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि (सतसंग में जाने की जल्दी में) घर में ताला लगाना ही भूल गई औरत। ट्रेन न छूट जाए। जल्दी-जल्दी तांगे पर सामान रखा और ताला बंद करना ही भूल गई। दरवाजा खुला ही रह गया। अब हवा जब चली तो दरवाजा थोड़ा खुल गया। तो देखो गुरु की दया की कुत्ता बिल्ली तक अंदर नहीं गए। और चोर आया तो सोचा दरवाजा खुला हुआ है, कोई अन्दर है जरूर, वापस चला गया। पड़ोसी ही चोर था। दिन में आया तो कोई आवाज़ नहीं, कुछ दिखाइ सुनाई नहीं पड़ा। तो कहा चलो रात को घुसेंगे। जब रात को आया तो देखा वहां आंगन में जयगुरुदेव बाबा बैठे हुए हैं। जब वापस लौटी तो वही चोर पड़ोसी आया कहा चाची प्रसाद नहीं लाई? कहा भैया लाये है, ले लो। पूछा कब आई? बोली हम तो आज ही आये है। पूछा परसों आई थी लेकिन तब मुझे प्रसाद नहीं दिया। बोली, परसों नहीं, हम तो आज आये हैं। बोला हम रात को देखे थे, बाबा जी भी आए थे, बैठे थे, हमको दिखाई पड़े और आप लोग आ गए थे, अंदर लाइट दीपक जल रहा था, अंदर आपके (घर में) रोशनी थी। तो प्रेमियों! ऐसे दया होती है। गुरु महाराज सतसंग में बोले, लोग हमसे पहरेदारी भी करवा लेते हैं। मुंडन नाम जनेऊ पहनवाते, सब करवा लेते हैं। ऐसा सेवक कहां मिलेगा तुमको? पैसा देने पर भी नहीं मिलेगा। समझो, गुरु की महिमा का वर्णन ही नहीं किया जा सकता।

कुछ चीजें तुरंत तो कुछ चीजें समय पर बताने वाली होती है

महाराज ने 11 अगस्त 2020 सांय  उज्जैन आश्रम में बताया कि कुछ चीजें ऐसी होती है जो समय पर बताने वाली होती है। और कुछ ऐसी होती है जो तुरंत बताने वाली होती है। तो अभी महापुरुषों के बारे में लोगों को पता चल जाए कि यही अवतार हैं, यही भगवान है, इस समय यही सब कुछ हैं तो उनके काम में बाधा आ जाती है। सन्त काल के देश में काल के दिए हुए इस शरीर में आते हैं तो काल भगवान की इस धरती के नियम का भी पालन उनको करना पड़ता है। इसलिए अपने को छुपा करके रखते हैं।

जात पात पूछी नहीं कोई, हरि का भजन सो हरि का होई

महाराज 3 मार्च 2019 लखनऊ में बताया कि आप किसी भी जाति मजहब के मानने वाले हो, यहां पर आए हो, आपको घर जमीन जायदाद बाल बच्चे अपना जाति धर्म गृहस्थ आश्रम कुछ नहीं छोड़ना है। साधु नहीं बनना है। जहां रहते हो, उसी तरह से रहो। हमारे लिए तो कोई जात धर्म कुछ नहीं। सब समान हैं। देखो एक साथ सब बैठे हैं। और हर जाति मजहब के लोग इसमें (आई हुई भक्तों की भीड़ में) मिल जाएंगे। यहां तो मानव और मानवता की बात है। कहा है- जात पात पूछे नहीं कोई, हरि को भजे सो हरि का होई। जो भजन करता है, भजननंदी होता है, प्रत्येक का होता है। तो यहां तो भजन करते हैं। भजन कराया सिखाया जाता है। भजन का तरीका अपनाने के लिए बताया जाता है। तो यहां पर तो कुछ (जाति-पाति) नहीं है। अभी सब एक साथ बैठकर के भोजन करेंगे। कोई किसी से पूछता है? ज्यादा पूछेंगे तो भाई आपका क्या नाम है? आप कहां से आए हो? ऐसे ही गुरु महाराज के यहां भी था। ऐसे ही हमारे यहां भी है। वह भी प्यार देते थे, प्यार करते थे जीवों से, मैं भी प्यार करता हूं। और इनके अंदर प्यार का बीज जब अंकुरित हो जाता है तो यह भी प्यार में आ जाते हैं। कोई किराए के थोड़ी है यहां। सब अपना खर्चा करके आते हैं। देशभक्ति देशप्रेम वफादारी सिखाई जाती है। सिखाया जाता है कि किसी का कर्जा मत रखो। नाव से नदी पार करते हो मल्लाही दे दो। बाल बनवाते हो तो बाल बनवाई के दे दो। किसी का कर्जा मत रखो। मेहनत ईमानदारी की कमाई पर, गुरु पर भरोसा रखो। हो सके किसी की मदद कर दो। किसी का बुरा मत चाहो। पक्का समाजसेवी देशभक्ति का पाठ प्रेमियों को यहां पढ़ाया जाता है। तो हमारे यहां तो कुछ नहीं। लेकिन हम आपके समाज की मर्यादा को भी नहीं तोड़ना चाहते हैं। बराबर बनी रहे। बड़ों का पैर छूओ, बड़ों की सेवा करो। सबके अंदर प्रेम का भाव रखो, हो सके तो किसी को रोटी खिला दो पानी पिला दो, कुछ इच्छा मन में रखकर नहीं, उससे कुछ पाने की इच्छा रखकर नहीं। परमार्थ तो वह होता है कि उससे बदले में कुछ इच्छा न रहे कि हमको इससे (खिलाने-पिलाने से) कुछ मिलेगा, उसके लिए कर दोगे तब वह परमार्थ माना जाएगा।