मनरेगा से सामाजिक एवं आर्थिक सुधार की प्रक्रिया को गति मिल रही है और ग्रामीण स्तर पर अशक्त लोगों की प्रगति का मार्ग हो रहा प्रशस्त इसी पर एक रिपोर्ट मस्तूरी के जुहली से पढ़े पूरी खबर

मनरेगा से सामाजिक एवं आर्थिक सुधार की प्रक्रिया को गति मिल रही है और ग्रामीण स्तर पर अशक्त लोगों की प्रगति का मार्ग हो रहा प्रशस्त इसी पर एक रिपोर्ट मस्तूरी के जुहली से पढ़े पूरी खबर
मनरेगा से सामाजिक एवं आर्थिक सुधार की प्रक्रिया को गति मिल रही है और ग्रामीण स्तर पर अशक्त लोगों की प्रगति का मार्ग हो रहा प्रशस्त इसी पर एक रिपोर्ट मस्तूरी के जुहली से पढ़े पूरी खबर

बिलासपुर//ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा आज ग्रामीणों की जीवन रेखा बनी हुई है अधिकांश ग्रामीण मनरेगा में कार्य कर अपने जीवन यापन भी कर रहे हैं ग्रामीणों का कहना है कि यहां काम करने से उनको दूसरी जगह रोजगार ढूंढना नहीं पड़ता और समय भी कम लगता है यही कारण है कि आज ग्रामीण मनरेगा की ओर खिंचे चले जा रहे हैं यह है वह महिला मेट जिनके सहयोग से जूहली में चल रहा मनरेगा का सुचारू रूप से कार्य शकुंतला राजनंदनी राज मालेश्वरी मारावी सीमा देवी जोगेश्वर सुनीता 

जुहली ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक महेश दास

बताते हैं कि भारत सरकार ने ग्रामीण विकास एवं सामुदायिक कल्याण की दृष्टि से राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियम, फरवरी,2006 में लागू किया। इस योजना का संक्षिप्त नाम 'नरेगा' रखा गया,जिसमें अक्टूबर,2009 से महात्मा गाँधी का नाम जोड़ा गया और इसका संक्षिप्त नाम 'मनरेगा' पड़ा। इस रोजगार गारंटी योजना में ग्रामीण क्षेत्र के अकुशल वयस्क स्त्री या पुरुष को श्रमयुक्त रोजगार दिया जाता है,परन्तु रोजगार न देने पर बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान है। 2. मनरेगा कार्यक्रम का स्वरूप - मनरेगा योजना के अन्तर्गत विविध कार्यक्रम चलाये जाते हैं, जैसे - (1) जल संरक्षण एवं जल - शस्य संचय, (2) वनरोपण एवं वृक्षारोपण, (3) इन्दिरा आवास योजना एवं अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के लिए भूमि सुधार, (4) लघु सिंचाई कार्यक्रम, (5) तालाब, कुएँ आदि का नवीनीकरण, (6) बाढ़ नियन्त्रण एवं जल - निकास, (7) ग्रामीण मार्ग - सड़क निर्माण तथा (8) अनुसूचित अन्य विविध कार्य। मनरेगा योजना के संचालन के लिए केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों के निर्देशन में पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से एक प्रशासनिक संगठनात्मक ढाँचा बनाया गया है, जिसमें जिला पंचायत, विकास खण्ड तथा ग्राम पंचायत को योजना के क्रियान्वयन का भार दिया गया है। इसमें ग्राम पंचायत की मुख्य भूमिका रहती है। 3. मनरेगा से रोजगार सुविधा - इस योजना में रोजगार माँगने वाले वयस्क व्यक्ति को ग्राम पंचायत से एक कार्ड दिया जाता है। आवेदन - पत्र देने की तिथि से ही उस आवेदक को पन्द्रह दिन के अन्तर्गत रोजगार उपलब्ध कराना पड़ता है। रोजगार न दिये जाने पर उसे बेरोजगारी भत्ता देना पड़ता है। वयस्क व्यक्ति को गाँव के पाँच किलोमीटर की सीमा में रोजगार दिया जाता है तथा कार्यस्थल पर प्राथमिक चिकित्सा सुविधा और महिला मजदूरों के छोटे बच्चों के देखभाल की सुविधा उपलब्ध करायी जाती है। मनरेगा रोजगार योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब लोगों का हित हो रहा है। 4. मनरेगा से सामाजिक सुरक्षा एवं प्रगति - मनरेगा कार्यक्रम में आमजन की भागीदारी होने से सामाजिक सुरक्षा एवं लोकहित का विस्तार हो रहा है। मनरेगा के लाभार्थियों की सक्रिय भागीदारी से गाँवों क है। इससे महिलाओं तथा अनुसूचित जाति - अनुसूचित जनजाति के लोगों में से वंचितों को रोजगार मिलने लगा है। इससे , महिला सशक्तीकरण पर भी बल दिया गया है। इस तरह मनरेगा से सामाजिक एवं आर्थिक सुधार की प्रक्रिया को गति मिल रही है और ग्रामीण स्तर पर अशक्त लोगों की प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा