कल CM हाउस में भव्य आयोजन: व्यापक रूप से मनाये जाएंगे छत्तीसगढ़ के पारम्परिक त्यौहार ‘पोला व तीजा‘... सुबह 10 बजे पधारेंगी माताएं-बहनें... छत्तीसगढ़िया थीम के आधार पर तैयार हुआ उत्सव का माहौल... देखें तस्वीरें....

Chhattisgarh Traditional festivals Pola and Teeja Celebration रायपुर, 26 अगस्त 2022/ तीन दिनों तक चलने वाले छत्तीसगढ़ के पारंपरिक तीजा-पोरा पर्व का उत्साह अब जोरों पर दिखाई पड़ रहा है। बाजारों में रौनक है और तिजहारीन माता-बहनें, किसान भाई और आमजन इस त्यौहार को पूरे उत्साह के साथ मनाने के लिए तैयारियों में जुटे हुए हैं। पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष भी पोरा के मौके पर 27 अगस्त को सुबह 10 बजे से मुख्यमंत्री निवास में भव्य उत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए यहां जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं।  ठेठ पारंपरिक अंदाज में मुख्यमंत्री निवास के प्रांगण को सजाया जा रहा है। यहां का पूरा माहौल उत्सव के अनुरूप रंग- बिरंगा और हमारी छत्तीसगढ़िया संस्कृति की झलक दिखाता हुआ नजर आ रहा है। अनेक नंदी बैल इस प्रांगण में जगह- जगह सजे नजर आ

कल CM हाउस में भव्य आयोजन: व्यापक रूप से मनाये जाएंगे छत्तीसगढ़ के पारम्परिक त्यौहार ‘पोला व तीजा‘... सुबह 10 बजे पधारेंगी माताएं-बहनें... छत्तीसगढ़िया थीम के आधार पर तैयार हुआ उत्सव का माहौल... देखें तस्वीरें....
कल CM हाउस में भव्य आयोजन: व्यापक रूप से मनाये जाएंगे छत्तीसगढ़ के पारम्परिक त्यौहार ‘पोला व तीजा‘... सुबह 10 बजे पधारेंगी माताएं-बहनें... छत्तीसगढ़िया थीम के आधार पर तैयार हुआ उत्सव का माहौल... देखें तस्वीरें....

Chhattisgarh Traditional festivals Pola and Teeja Celebration

 

रायपुर, 26 अगस्त 2022/ तीन दिनों तक चलने वाले छत्तीसगढ़ के पारंपरिक तीजा-पोरा पर्व का उत्साह अब जोरों पर दिखाई पड़ रहा है। बाजारों में रौनक है और तिजहारीन माता-बहनें, किसान भाई और आमजन इस त्यौहार को पूरे उत्साह के साथ मनाने के लिए तैयारियों में जुटे हुए हैं। पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष भी पोरा के मौके पर 27 अगस्त को सुबह 10 बजे से मुख्यमंत्री निवास में भव्य उत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए यहां जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। 

ठेठ पारंपरिक अंदाज में मुख्यमंत्री निवास के प्रांगण को सजाया जा रहा है। यहां का पूरा माहौल उत्सव के अनुरूप रंग- बिरंगा और हमारी छत्तीसगढ़िया संस्कृति की झलक दिखाता हुआ नजर आ रहा है। अनेक नंदी बैल इस प्रांगण में जगह- जगह सजे नजर आ रहे हैं, जो समृद्धि और खुशहाली का एहसास दिला रहे हैं। सूपा और टोकनी पर रंगों की खूबसूरत कारीगरी के साथ इन्हें जगह-जगह बेहद निराले अंदाज में सजाया गया। रंग-बिरंगे तोरण और पारंपरिक कलाकारी, उत्सव की थीम के अनुरूप यहां की खूबसूरती को बढ़ा रही है। 

कुल मिलाकर माहौल ठेठ छत्तीसगढ़िया तीजा- पोरा वाला दिखाई पड़ रहा है। प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने माताओं-बहनों से अपील की है कि वे इस उत्सव में शामिल होकर मुख्यमंत्री निवास की शोभा बढ़ाएं। उत्सव में महिला पत्रकारों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। तिजरहिन माता-बहनें मुख्यमंत्री निवास को अपना मायका समझकर यहां आएं, उनका स्वागत है।

छत्तीसगढ़ में तीज, त्यौहारों की एक समृद्ध परम्परा है। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ की संस्कृति के सरंक्षण और संर्वधन के लिए प्रदेश में हरेली, तीजा, माता कर्मा जयंती, छठ पूजा और विश्व आदिवासी दिवस के दिन न केवल सार्वजनिक अवकाश की शुरूआत की है, बल्कि इन लोक पर्वों के महत्व से आने वाली पीढ़ी को जोड़ने के लिए इन्हें जन सहभागिता से पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। स्थानीय त्यौहारों को जन सहभागिता के जोड़कर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा छत्तीसगढ़ की संस्कृति का संवर्धन एवं संरक्षण करने का प्रयास किया जा रहा है।

इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के पारम्परिक त्यौहार पोला एवं तीज को व्यापक स्तर पर मनाने के लिए मुख्यमंत्री निवास में तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। हरेली पर्व की तरह ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रायपुर स्थित निवास पर इन दोनों पारम्परिक त्यौहारों को व्यापक स्तर पर मनाया जाएगा।

 पोला व तीज पर्व के लिए मुख्यमंत्री निवास में विशेष तैयारियां की गई हैं और तीज मना रही माताओं एवं बहनों की स्वागत के लिए ये पूरी तरह से तैयार है। मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ की परम्परा और रीति रिवाज के अनुसार साज सज्जा की गई है। मुख्यमंत्री निवास में पहले पोला पर्व का आयोजन होगा। इस मौके पर नंदी बैल की पूजा की जाएगी, इसी के साथ ही यहां पर तीजा महोत्सव का भी आयोजन किया जाएगा। तीजा महोत्सव के लिए प्रदेश के विभिन्न स्थानों से तीजहारिन माताओं एवं बहनों को मुख्यमंत्री निवास के लिए आमंत्रित किया गया है। इस अवसर पर बहनों द्वारा करूभात खाने की रस्म पूरी की जाएगी और छत्तीसगढ़ के पारम्परिक खेलों का आयोजन किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ का पोरा तिहार मूल रूप से खेती किसानी से जुड़ा पर्व है। खेती किसानी में बैल और गौवंशी पशुओं के महत्व को देखते हुए इस दिन उनके प्रति आभार प्रकट करने की परंपरा है। छत्तीसगढ़ के गांवों में इस पर्व में बैलों को विशेष रूप से सजाया जाता है। उनकी पूजा की जाती है। इस मौके पर घरों में बच्चे मिट्टी से बने नंदी बैल और बर्तनों के खिलौनों से खेलते हैं। घरों में ठेठरी, खुरमी, गुड़चीला, गुलगुला, भजिया जैसे पकवान तैयार किए जाते हैं और उत्सव मनाया जाता है। इस पर्व के अवसर पर बैलों की दौड़ भी आयोजित की जाती है। 

छत्तीसगढ़ में तीजा (हरतालिका तीज) की विशिष्ट परम्परा है, तीजहारिन महिलाएं तीजा मनाने ससुराल से मायके आती हैं। तीजा मनाने के लिए बेटियों को पिता या भाई ससुराल से लिवाकर लाते है। छत्तीसगढ़ में तीजा पर्व की इतना अधिक महत्व है कि बुजुर्ग महिलाएं भी इस खास मौके पर मायके आने के लिए उत्सुक रहती हैं। महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए तीजा पर्व के एक दिन पहले करू भात ग्रहण कर निर्जला व्रत रखती हैं। तीजा के दिन बालू से शिव लिंग बनाया जाता है, फूलों का फुलेरा बनाकर साज-सज्जा की जाती है और महिलाएं भजन-कीर्तन कर पूरी रात जागकर शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं।

 

 

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