CG - आवेदिका को आयोग ने दिवानी मामला और एफ.आई. आर. करने के दिये निर्देश संबंधित थाने के एस.आई. करेंगे मदद...




आवेदिका को आयोग ने दिवानी मामला और एफ.आई. आर. करने के दिये निर्देश संबंधित थाने के एस.आई. करेंगे मदद।
दूसरी महिला ने आयोग को आश्वस्त किया कि वह कभी भी आवेदिका के पति से नही मिलेगी ना ही कोई संबंध रखेगी।
आयोग की समझाईश पर अनावेदक 1 लाख रूपये वापस करने को हुआ तैयार।
रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने आज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से सबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में आज 268 वी. सुनवाई हुई। रायपुर जिले में कुल 130 वी. जनसुनवाई।
आज की सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में दोनों पक्षों के मध्य एकतरफा तलाक का आवेदन प्रस्तुत किया गया। आवेदिका को इसकी जानकारी नहीं थी। क्योंकि वह न्यायालय में उपस्थित नहीं थी। आवेदिका को तलाक का कैंसिलेशन करवाने की समझाइश दी गई। कार्यवाही के दौरान यह पता चला कि आवेदिका अपने पूर्व पति से भी आपसी सहमति से तलाक लेकर 11 वर्षों से अलग रह रही है। 2 वर्ष पूर्व अनावेदक ने यह सब जानते हुए आवेदिका से विवाह किया था। 2 वर्ष के बीच दोनो पक्षों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसका कारण दूसरी महिला है। जो अनावेदक के क्लीनिक में नर्स का कार्य करती है।
दूसरी महिला अपने माता-पिता के साथ आयोग में उपस्थित हुई। दूसरी महिला के माता-पिता ने आयोग को आश्वासन दिया कि उनकी बेटी आज के बाद अनावेदक के क्लीनिक में कार्य करने नहीं जायेगी। इस आशय पर शपथ पत्र प्रस्तुत किये जाने पर दूसरी महिला को उसके माता-पिता को सुपुर्द किया जायेगा। दूसरी महिला व उसके माता पिता को कड़े शब्दों में यह समझाईश दी गई कि दूसरी महिला अनावेदक के क्लिीनिक व घर से कोई संपर्क नहीं रखेगी यदि ऐसा करते पाई गई तो उसे नारी निकेतन भेज दिया जायेगा, तथा आवेदिका व अनावेदक का प्रकरण न्यायालय में निराकृत हो चुका है आयोग में प्रकरण का कोई औचित्य ना होने के कारण प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।
एक अन्य प्रकरण में दोनो पक्षों को सुना गया। आवेदिका ने बताया कि अनावेदक ने आवेदिका से 1 लाख रू. स्टाम्प में लिखा पढ़ी करके प्राप्त किया था, परंतु वापस नहीं किया है। आयोग की समझाईश पर अनावेदक रूपये वापस करने को तैयार हुआ। तय दिनांक पर अनावेदक आयोग के समक्ष उपस्थित होकर उक्त राशि का चेक आवेदिका को देगा। रूपये वापसी के पश्चात् प्रकरण नस्तीबध्द किया जायेगा।
एक प्रकरण के दौरान दोनों पक्ष उपस्थित हुए, जिसमें आवेदिका ने अनावेदक का दूत्तरी महिला से संबंध होने की शिकायत की थी। अनावेदक ने बताया कि वकील के पास जाकर आपसी सहमति से संबंध विच्छेद का अग्रीमेंट 100 रू. के स्टाम्प में बनाया गया था। जिसमें दोनो पक्षों के हस्ताक्षर है। आवेदिका का कहना है कि वकील ने कहा कि दोनों का समझौतानामा तैयार किया जा रहा है। इसलिए हस्ताक्षर किया था। दोनो पक्षों के मूल दस्तावेज अभिलेख में रखा गया व आगामी सुनवाई में अनावेदक को वकील तथा दूसरी महिला को लेकर उपस्थित होने का निर्देश दिया गया ताकि प्रकरण का निराकरण किया जा सके।
एक प्रकरण में अनावेदकगणों को थाना सारंगड-बिलाईगढ़ के एस.आई के माध्यम से आयोग की सुनवाई में उपस्थित किया गया। आवेदिका के द्वारा 100 रू. के स्टाम्प में अनावेदकगणों के किये गये इकरारनामे का दस्तावेज प्रस्तुत किया। अनावेदक ने अपने हस्ताक्षर की पहचान पूर्व की सुनवाई में किया था, तब उसने इकरारशुदा राशी को इंकार नहीं किया था लेकिन आज दलील देकर पैसा लेने से मुकर रहे है। दोनों पक्षों के बीच दस्तावेज से स्पष्ट है कि अनावेदकगणों के द्वारा आवेदिका को धोखाधड़ी कर 9 लाख 32 हजार रू. आवेदिका से प्राप्त किया है। आवेदिका को समझाईश दी गई कि यह जिला- सारगढ़ में दिवानी मामला लगा सकती है। वहां एफ.आई.आर भी दर्ज करा सकती है। उपस्थित एस.आई को जिम्मेदारी दी गई कि वह अनावेदक के खिलाफ एफ.आई.आर. तत्काल दर्ज कर कार्यवाही कर 15 दिवस के अंदर आयोग को सूचित करे जिससे प्रकरण का निराकरण किया जा सके।