Buffalo for Dairy Farming: डेयरी फार्म शुरू कर घर लाएं इन 4 नस्लों की भैंस, होगी बम्पर कमाई...
Buffalo for Dairy Farming: Start a dairy farm and bring home these 4 breeds of buffalo, will earn bumper... Buffalo for Dairy Farming: डेयरी फार्म शुरू कर घर लाएं इन 4 नस्लों की भैंस, होगी बम्पर कमाई...




Buffalo for Dairy Farming:
व्यवसाय के लिहाज से भैंसों का पालन अन्य पशुओं के मुकाबले काफी बेहतर माना जाता है देश में भैंसों की 26 ऐसी नस्लें हैं, जिनका पान दूध व्यवपार के लिए किया जाता है. इनमें से चिल्का, मेहसाना, सुर्ती और तोड़ा जैसी भैंसें पशुपालकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं. इन सभी भैंसों का दूध उत्पादन अन्य नस्ल की भैंसों की तुलना में अधिक होता है. गांवों में भैंस पालन को सबसे ज्यादा तरजीह दिया जाता है. दरअसल, ज्यादातर भैंसे कम देखभाल में अधिक दूध का उत्पादन करती हैं. (Buffalo for Dairy Farming)
मेहसाना भैंस :
यह नस्ल गुजरात के मेहसाणा जिले और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में पाई जाती है. भैंस की इस नस्ल का रंग काला होता है, तो वहीं कुछ का रंग काला-भूरा भी पाया जाता है. इनका शरीर मुर्रा नस्ल की भैंस के तुलना में काफी बड़ा होता है. मगर इनका वजन उनसे कम होता है. इनके सींग दरांती से आकार के होते हैं, तो वहीं मुर्रा भैंस से कम घूमी हुई रहती हैं. इसका औसत उत्पादन 1200 से 1500 किलो प्रति ब्यांत होता है. (Buffalo for Dairy Farming)
सुर्ती भैंस :
यह नस्ल गुजरात के खेड़ा और बड़ौदा में पाई जाती है. इनका रंग भूरा, सिल्वर सलेटी या फिर काला होता है. यह आकार में मध्यम होती हैं, साथ ही धड़ नुकीला और सिर लंबा होता है. इनके सींग दराती के आकार के होते हैं. इसकी औसत उत्पादन क्षमता 900 से 1300 लीटर प्रति ब्यांत होती है. भैंस की इस नस्ल के दूध में 8 से 12 प्रतिशत वसा की मात्रा पाई जाती है. (Buffalo for Dairy Farming)
चिल्का भैंस :
भैंस की इस नस्ल को उड़ीसा कटक, गंजम, पुरी और खुर्दा जिलों में पाया जाता है. इस भैंस का नाम उड़ीसा के चिल्का के झील के नाम पर पड़ा है. इसे ‘देशी’ नाम से भी जाना जाता है. यह भैंस खारे क्षेत्रों में ज्यादा पाई जाती है. इसका रंग भूरा-काला या काला होता है. यह आकार में मध्यम होती है, साथ ही औसत दूध उत्पादन 500 से 600 किलोग्राम प्रति ब्यांत होता है. (Buffalo for Dairy Farming)
तोड़ा भैंस :
आदिवासियों के नाम पर भैंस की इस नस्ल का नाम तोड़ा पड़ा है, जो कि तमिलनाडु के नीलगिरी पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है. इस नस्ल के शरीर पर काफी मोटा बालकोट होता है. इनकी औसत उत्पादन क्षमता प्रति ब्यांत 500 से 600 किलोग्राम होती है. खास बात यह है कि इनके दूध में 8 प्रतिशत वसा की मात्रा पाई जाती है. (Buffalo for Dairy Farming)