Bastar Dussehra: काछन देवी ने दी बस्तर दशहरा के आयोजन की अनुमति….छह साल की पीहू की अनुमति से शुरू हुआ दशहरा पर्व…पढ़िए Bastar Dussehra की अनोखी रस्म….

Bastar Dussehra: Kachan Devi gave permission to organize Bastar Dussehra .... Dussehra festival started with the permission of six year old Pihu छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बस्तर दशहरा को विधिवत व प्रतिकात्मक रूप से मनाने की अनुमति काछन गादी देवी ने काछनगुड़ी में राज परिवार को दी है। इस विधान के साक्षी होने शनिवार को बड़ी संख्या में लोग भंगाराम चौक स्थित काछनगुड़ी मंदिर पहुंचे थे

Bastar Dussehra: काछन देवी ने दी बस्तर दशहरा के आयोजन की अनुमति….छह साल की पीहू की अनुमति से शुरू हुआ दशहरा पर्व…पढ़िए Bastar Dussehra की अनोखी रस्म….
Bastar Dussehra: काछन देवी ने दी बस्तर दशहरा के आयोजन की अनुमति….छह साल की पीहू की अनुमति से शुरू हुआ दशहरा पर्व…पढ़िए Bastar Dussehra की अनोखी रस्म….

Bastar Dussehra: Kachan Devi gave permission to organize Bastar Dussehra .... 

नया भारत डेस्क : छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बस्तर दशहरा को विधिवत व प्रतिकात्मक रूप से मनाने की अनुमति काछन गादी देवी ने काछनगुड़ी में राज परिवार को दी है। इस विधान के साक्षी होने शनिवार को बड़ी संख्या में लोग भंगाराम चौक स्थित काछनगुड़ी मंदिर पहुंचे थे। काछनदेवी के रूप में मारेंगा की पनका समुदाय की 6 वर्षीय बालिका पीहू बेल कांटों से बने झुले में सवार होकर बस्तर महाराज कमलचंद्र भंजदेव को प्रसाद भेंटकर बस्तर दशहरा धूमधाम से मनाने का आशीर्वाद दिया। जिसके बाद लोगों ने बस्तर दहशरा की बधाई दी।

 

इस अवसर पर बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष श्री दीपक बैज, संसदीय सचिव श्री रेखचंद जैन, नगर निगम सभापति श्रीमती कविता साहू, कलेक्टर श्री चंदन कुमार, मांझी, चालकी समेत श्रद्धालुओं का सैलाब देखा गया।


हर साल पथरागुड़ा जाने वाले मार्ग स्थित भंगाराम चौक के समीप स्थित काछनगुड़ी में काछनगादी विधान संपन्न कराया जाता है। बस्तर दशहरा की शुरूवात काछन देवी की अनुमति के बगैर नहीं हो सकती। काछनगुड़ी रस्म में काछनदेवी कांटों के झूले में सवार होकर महाराजा को प्रसाद भेंटकर बस्तर दशहरा बनाने की अनुमति देती है। 

 

नवरात्रि के एक दिन पहले निभाई जाती है अद्भुत रस्म

 

अब उसकी जगह 6 साल की पीहू काछनदेवी के रूप में कांटों के झूले पर लेटकर सदियों पुरानी परंपरा को निभाने की अनुमति दी. मान्यता है कि महापर्व को निर्बाध संपन्न कराने के लिए काछनदेवी की अनुमति जरूरी है. इसके लिए पनिका जाति की कुंवारी कन्या को बेल के कांटों से बने झूले पर लिटाया जाता है. इस दौरान उसके अंदर खुद देवी आकर पर्व शुरू करने की अनुमति देती है.

 

हर साल नवरात्रि के एक दिन पहले पितृमोक्ष अमावस्या को रस्म निभाकर राज परिवार अनुमति प्राप्त करता है. इस दौरान बस्तर का राज परिवार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ सैकड़ों की संख्या में लोग अनूठी परंपरा को देखने काछनगुड़ी पहुंचते हैं. 75 दिनों तक मनाए जाने वाले दशहरा पर्व में 12 से ज्यादा निभाई जानेवाली रस्में अद्भुत और अनोखी होती हैं.