फ्रांस की राष्ट्रपति पद की एक उम्मीदवार ने कहा कसम से, अगर हमारी सरकार बनती है, तो फ्रांस में हिजाब पहनने पर जुर्माना लगाया जाएगा।
government is formed, wearing a hijab in France will be fined..




NBL, 08/04/2022, Lokeshwer Prasad Verma,. A French presidential candidate has said that, if her government is formed, wearing a hijab in France will be fined.
पेरिस, अप्रैल 08: फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रचार-प्रसार चल रहा है और फ्रांस के नेता जिस अंदाज में लोगों से वोट की अपील कर रहे हैं, ऐसा महसूस हो रहा है, जैसे ये चुनाव भारतीय 'अंदाज' में लड़ा जा रहा हो।
फ्रंस में भी मुसलमानों को लेकर काफी राजनीति हो रही है और मुस्लिमों पर बनाए अपने कानूनों को लेकर फ्रांस काफी लंबे वक्त से विवादों में रहा है। अब फ्रांस की राष्ट्रपति पद की एक उम्मीदवार ने कहा है कि, अगर उनकी सरकार बनती है, तो फ्रांस में हिजाब पहनने पर जुर्माना लगाया जाएगा।
हिजाब पर जुर्माने का वादा..
फ्रांस की दक्षिणपंथी नेता और राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मरीन ले पेन ने गुरुवार को सार्वजनिक रूप से हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिलाओं पर जुर्माना लगाने की कसम खाई है। फ्रांस में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव अभियान काफी तेजी से जारी है और रविवार को वोट डाले जाएंगे और उससे पहले मरीन ले पेन की ये घोषणा ने फ्रांस की राजनीति को विवादित बना दिया है। मरीन ले पेन, राष्ट्रपति पद के लिए प्रमुख उम्मीदवार हैं और वो मौजूदा राष्ट्रपति से वोटों के मामले में काफी करीब हैं, लिहाजा फ्रांस के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि, मरीन ले पेन वोटों का ध्रुवीकरण करना चाहती हैं।
मरीन ले पेन की दावेदारी अहम..
फ्रांस के मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को होने वाले पहले दौर के मतदान से पहले ओपिनियन पोल्स में अजेय बढ़त बनाते दिख रहे थे, लेकिन ले पेन ने पिछले कुछ दिनों में अंतर को काफी कम कर दिया और मरीन ले पेन को लगता है, कि उनके पास 24 अप्रैल को रन-ऑफ जीतने का एक वास्तविक मौका है। फ्रांस की राजनीति में दक्षिणपंथी राजनीति का भारी दबदबा रहा है और मौजूदा राष्ट्रपति मैक्रों भी एक दक्षिणपंथी नेता माने जाते हैं, वहीं, फ्रांस की ज्यादातर राजनीतिक पार्टियों में दक्षिणपंथी विचारधारा को ज्यादा से ज्यादा अपनाने की होड़ मची रहती है।
चुनाव में हिजाब कार्ड..
फ्रांस की वामपंथी पार्टियां इस बार भी वोटरों को अपनी तरफ करने में नाकाम साबित हो रहे हैं और धूर वामपंथी उम्मीदवार जीन-ल्यूक मेलेनचॉन के तीसरे नंबर पर रहने की संभावना है। हालांकि, उन्हें अभी भी उम्मीद है, कि वो आगे बढ़त बना सकते हैं। वहीं, आरटीएल रेडियो से बात करते हुए, मरीन ले पेन ने बताया कि, कैसे सभी सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगाने की उनकी प्रतिज्ञा को लागू किया जाएगा। मरीन ले पेन ने रेडियो से बात करते हुए कहा कि, जिस तरह से कार में बैठने पर सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य होता है और उल्लंघन करने पर जुर्माना देना होता है, हिजाब पहनना भी कुछ ऐसा ही होगा। जो महिलाएं हिजाब पहनेंगी, उन्हें जुर्माना देना होगा। उन्होंने कहा कि, 'मुझे लगता है कि फ्रांस की पुलिस काफी आसानी से इन उपायों को लागू करवा लेगी'।
मरीन ले पेन कैसे लागू करेंगी कानून?
मरीन ले पेन का मानना है कि, वह अपनी कई प्रस्तावित कानूनों को संवैधानिक चुनौतियों से बचाने के लए जनमत संग्रह का इस्तेमाल करेंगी और भेदभावपूर्ण और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन करने वाली चीजों को सख्ती से प्रतिबंधित करेंगी। आपको बता दें कि, फ़्रांस में स्कूलों में स्पष्ट धार्मिक प्रतीकों पर प्रतिबंध पिछले साल लगाया गया था, जिसका काफी विरोध किया गया था। लेकिन, फ्रांस सरकार ने यह दलील देते हुए स्कूलों में हिबाज पर प्रतिबंध लगाया था, कि स्कूल का ड्रेस फ्रांस के हर छात्र पर लागू होता है और हिबाज से स्कूलों में छात्रों के प्रति भेदभाव होता है। वहीं, मरीन ले पेन ने इस चुनाव में घरेलू मुद्दों को काफी उठाया है, लिहाजा पिछले कुछ दिनों में उन्होंने वोटरों के बीच काफी लोकप्रियता हासिल की है।
ओपिनियन पोल में मैक्रों को मामूली बढ़त..
आपको बता दें कि, फ्रांस में करवाए गये लेटेस्ट ओपिनियन पोल में मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों हालांकि अपनी प्रतिद्वंदी से थोड़े आगे हैं, लेकिन मरीन ले पेन काफी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। ताजा ओपिनयन पोल में पता चला है कि, इमैनुएल मैक्रों 54 प्रतिशत वोटों के साथ आगे हैं, तो मरीन ले पेन को भी 46 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है। यानि, मरीन ले पेन और मैक्रों के बीच का फासला ज्यादा नहीं है। फ्रांस में वोटों की गिनती 24 अप्रैल को होगी और इन सबके बीच वामपंथी उम्मीदवार मेलेनचॉन, जो काफी आक्रामक बयान देने के लिए जाने जाते हैं, वो भी तेजी से आगे बढ़ने का दावा कर रहे हैं और अपनी जीत की संभावना का दावा कर रहे हैं। फ्रांस में पिछले कुछ महीनों में मुद्दे काफी बदले हैं और कोविड-19 संकट के दौरान अस्पतालों की व्यवस्था को लेकर सरकार को विरोधी कटघरे में खड़ा रहे हैं, वहीं यूक्रेन युद्ध का भी असर फ्रांस के चुनाव पर पड़ने की संभावना है, लिहाजा मैंक्रो यूक्रेन संकट पर सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं।
चुनाव के लिए अंतिम रैलियां..
मरीन ले पेन को गुरुवार शाम को दक्षिणी गढ़ पेर्पिग्नन में अपनी अंतिम चुनावी अभियान रैली को संबोधित करनी है, जहां उनकी राष्ट्रीय रैली पार्टी को लंबे समय से मजबूत समर्थन मिला है और जहां की स्थानीय परिषद पर उन्ही की पार्टी को बहुमत है। वहीं, पिछले साल फ्रांस में हुए क्षेत्रीय चुनाव में मरीन ले पेन की पार्टी ने निराशाजनक प्रदर्शन किया था, लिहादा अपने समर्थकों में जोश भरने के लिए वो काफी आक्रामक अंदाज में चुनाव प्रचार कर रही है।
इमैनुएल मैक्रों की स्थिति..
यूक्रेन युद्ध की वजह से मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने काफी देर से चुनावी अभियान में हिस्सा लेना शुरू किया है और गुरुवार को प्रकाशित एक इंटरव्यू में मैक्रों ने ले फिगारो अखबार को बताया कि, "मैंने संकटों का अनुभव किया है और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी अनुभव हासिल किया है और मैंने अपनी गलतियों से भी सीखा है।" उन्होंने इस बात को स्वीकार किया है कि, साल 2017-2019 के दौरान उनकी सरकार के शासन में प्रवासियों की संख्या में इजाफा हुआ है और वो उन प्रवासियों को देश से बाहर निकालने में नाकामयाब रहे हैं। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि, मरीन ले पेन जितनी आक्रामक हैं और जिस तरह से वो सांप्रदायिक शब्दों का इस्तेमाल कर रही हैं, उसका उन्हें भारी नुकसान भी हो सकता है, क्योंकि एक वक्त के बाद लोग देश के विकास के सामने सांप्रदायिक ताकतों को अस्वीकार कर देते हैं।