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CG – चैतमा व पोड़ी उपार्जन केंद्र से धान उठाव में कछुआ चाल की गति बनी समस्या समिति को सताने लगी सूखत की चिंता फड़ो में भी सिकुड़ने लगी जगह पढ़े पूरी ख़बर

On: January 15, 2026 11:15 AM
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कोरबा//जिले के पाली विकासखण्ड अंतर्गत धान उपार्जन केंद्र चैतमा व पोड़ी केंद्र का हाल बुरा है। इन जगहों से धान का उठाव और परिवहन की गति बेहद धीमी होने की वजह से कई तरह का समस्या सामने आ रहा है, जहां समिति के सदस्यों एवं कर्मचारियों को सूखत की चिंता सताने लगी है, वहीं दूसरी ओर किसानों को अब धान रखने जगह के लिए समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ में इस बार प्रति क्विंटल 3100 रुपए के हिसाब से धान की खरीदी हो रही है। इसी कड़ी में कोरबा जिले के चैतमा एवं पोड़ी उपार्जन केंद्र में शासन के किसान हितैषी व्यवस्था अनुसार कृषकों के धान की खरीदी तो की जा रही है और उन किसानों को धान का पैसा भी मिल गया, लेकिन इन उपार्जन केंद्रों से धान का उठाव बेहद धीमी गति से होने के कारण धान का बंपर स्टॉक पड़ा हुआ है। इससे न केवल प्रति बोरी में लगभग 2 से 3 किलो धान सूख रहा है और इसका सीधा नुकसान धान उपार्जन केंद्रों को होगा, वहीं जगह सिकुड़ने से किसानों को भी अपना धान रखने में परेशानी हो रही है। चैतमा व पोड़ी केंद्र में धान की आवक ज्यादा और मिलर्स द्वारा उठाव न के बराबर हो रहा है, जिससे केंद्र भंडारण क्षमता से ऊपर जा रहा है और हजारो क्विंटल धान जाम होने से खरीदी प्रभावित हो रही है। हालांकि जिला प्रशासन द्वारा इसे तेज करने के निर्देश दिए गए है, लेकिन राइस मिलर्स जमीनी स्तर पर धान का उठाव को लेकर सुस्त रवैया अपना रहे है, जिससे यह समस्या उत्पन्न हुई है। ऐसे में समय पर धान का उठाव नही होने से समिति के कर्मचारियों को चिंता सताने लगी है, क्योंकि धान सूखत की गाज समिति कर्मचारियों के ऊपर ही गिरता है। इसे लेकर उनका कहना है कि धान उठाव कार्य कछुआ गति से चल रहा है। परिवहनकर्ता एक से दो गाड़ी भेज रहे है तो कई- कई दिन गाड़ी ही नही लगती, जबकि जरूरत अधिक गाड़ी और नियमित उठाव की है। हम अपने स्तर से पूरा सहयोग कर रहे है, फिर भी किसानों को अपना धान रखने की समस्या जा रही है। इस हालात में धान खरीदी सीजन में चैतमा और पोड़ी उपार्जन केंद्र से धान के उठाव की धीमी गति एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जो किसानों एवं व्यवस्था दोनों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही है। जिला प्रशासन को इस ओर गंभीरता दिखाने की जरूरत है।

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