रायपुर। छत्तीसगढ़ में मौसम ने फिर करवट ली है। मौसम विभाग के ताजा अनुमान के मुताबिक, प्रदेशवासियों को अगले 48 घंटों तक कड़ाके की ठंड से थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन यह राहत केवल एक बड़े बदलाव का संकेत है। इसके तुरंत बाद राज्य में न्यूनतम तापमान में 3 डिग्री तक की भारी गिरावट आएगी, जिससे ठिठुरन और गलन बढ़ जाएगी। विभाग ने चेतावनी दी है कि जनवरी के पहले सप्ताह में लोगों को न केवल सर्द हवाओं का सामना करना पड़ेगा, बल्कि हल्की बारिश और घना कोहरा भी मुसीबत बढ़ा सकता है।
मौसम विज्ञान केंद्र, रायपुर के विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर पाकिस्तान और उससे सटे पंजाब के ऊपर एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ है। यह समुद्र तल से 3.1 किमी ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण के रूप में मौजूद है। इस मौसमी तंत्र के कारण अरब सागर से नमी छत्तीसगढ़ की ओर आ रही है। इसके प्रभाव से आने वाले 24 से 48 घंटों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में बादल छाए रहेंगे और कहीं-कहीं बहुत हल्की से हल्की बारिश होने की प्रबल संभावना है। बारिश के बाद जैसे ही आसमान साफ होगा, उत्तरी ठंडी हवाएं सीधे मैदानी इलाकों में प्रवेश करेंगी, जिससे तापमान तेजी से गिरेगा।
पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ के तापमान में भारी अंतर देखा गया है। दुर्ग संभाग के कुछ जगहों में शीत लहर जैसे हालात बने रहे। हालांकि, दिलचस्प बात यह रही कि प्रदेश में सर्वाधिक तापमान भी दुर्ग में ही 29.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, उत्तर छत्तीसगढ़ यानी सरगुजा संभाग पूरी तरह से ठंड की चपेट में है। अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 5.4 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया है, जो इस सीजन के सबसे कम स्तरों में से एक है। बस्तर संभाग में भी रातें अब काफी सर्द होने लगी हैं।
बारिश और नमी के कारण मैदानी इलाकों में घना कोहरा छाने की संभावना जताई गई है। राजधानी रायपुर समेत बिलासपुर और दुर्ग संभाग के जिलों में सुबह के समय विजिबिलिटी 500 मीटर से भी कम रह सकती है। रायपुर में आज सुबह से ही धुंध का असर देखा जा रहा है। यहां अधिकतम तापमान 28 डिग्री और न्यूनतम 12 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान है। मौसम विभाग का कहना है कि 4 जनवरी के बाद से प्रदेश के अधिकांश जिलों में कोल्ड डे जैसे हालात बन सकते हैं, जहां दिन में भी धूप की तपिश महसूस नहीं होगी।
आम लोगों के लिए विशेष सावधानी
बदलते मौसम और बारिश के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने का खतरा रहता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को सर्दी-जुकाम और श्वास संबंधी रोगों से बचने की सलाह दी गई है। किसानों के लिए भी यह समय संवेदनशील है, क्योंकि बिन मौसम बारिश दलहन और तिलहन की फसलों को प्रभावित कर सकती है। विभाग ने वाहन चालकों को भी सुबह के समय कोहरे को देखते हुए सावधानी बरतने की हिदायत दी है।





